होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने को तैयार आठ करोड़ बैरल तेल, जहाजों के लिए नए दिशानिर्देश
Strait Of Hormuz Reopening
नई दिल्ली: Strait Of Hormuz Reopening: वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. यदि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ हालिया समझौता स्थायी रूप से लागू रहता है, तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर से सामान्य हो जाएगी. वर्तमान में, लगभग 40 वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) यानी सुपरटैंकर फारस की खाड़ी के भीतर खड़े हैं, जो जलमार्ग के पूरी तरह खुलने का इंतजार कर रहे हैं. इन जहाजों पर लगभग 80 मिलियन (8 करोड़) बैरल गैर-प्रतिबंधित कच्चा तेल लदा हुआ है.
अतिरिक्त तेल की भारी खेप
शिपिंग ट्रैकिंग डेटा फर्म 'वॉर्टेक्सा' के आंकड़ों के अनुसार, इन 40 सुपरटैंकरों के अलावा, खाड़ी क्षेत्र में ईरान के अपने तेल टैंकर और कई छोटे जहाज भी तैनात हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी को जोड़ दिया जाए, तो बाजार में आने के लिए तैयार कच्चे तेल की वास्तविक मात्रा इस आंकड़े से कहीं अधिक है. अमेरिकी-ईरानी संघर्ष के कारण पैदा हुए व्यवधानों से पहले, इस मार्ग से रोजाना लगभग 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल एशियाई देशों को भेजा जाता था.
एशियाई बाजारों की ओर रुख
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 21 सुपरटैंकरों ने पहले ही एशिया की तरफ बढ़ने के संकेत दे दिए हैं. इनमें से 5 टैंकर सीधे चीन के लिए रवाना हो रहे हैं, जबकि 5 अन्य टैंकर मलेशिया और सिंगापुर के करीब 'शिप-टू-शिप' ट्रांसफर हब की ओर बढ़ रहे हैं. इसके अलावा, सऊदी अरब के तीन सुपरटैंकरों को ओमान की खाड़ी में सामान्य गति से आगे बढ़ते हुए देखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि व्यापारिक यातायात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है.
ईरान के कड़े नए नियम
भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है, लेकिन ईरान ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए बेहद कड़े और नए नियम लागू कर दिए हैं. नए नियमों के तहत:
48 घंटे पहले रजिस्ट्रेशन: सभी जहाज मालिकों और ऑपरेटरों को होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने से कम से कम 48 घंटे पहले ट्रांजिट अनुरोध जमा करना होगा.
परमिट और बीमा: खाड़ी में एंट्री और एग्जिट के समय किसी भी देरी से बचने के लिए जहाजों के पास वैध परमिट और विशेष समुद्री बीमा होना अनिवार्य है.
बाजार पर असर: इस समझौते की खबर आते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. कच्चे तेल के दाम गिरकर लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में आई इस कमी से आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महंगाई को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संगठनों ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र में अभी भी सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, इसलिए जहाजों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.